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अपने मन को बदलना ही सच्ची साधना है–विश्रुतसागर जी

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अपने मन को बदलना ही सच्ची साधना है–विश्रुतसागर जी

खंडवा ।। आज का मनुष्य शंका कुशंका के दोष से घिरा हुआ है।वह अपने काम व काबिलियत पर भरोसा ही नहीं कर पा रहा है।रेडीमेड और इंस्टेंट के चक्कर मे हम प्रमादी और आलसी बनते जा रहे हैं।हम अपनी शक्ति को भूलते जा रहे हैं।जबकि प्रत्येक जीव भगवान आत्मा है और उसमें भगवान बनने की शक्ति है।उसके लिये पुरुषार्थ और कर्म तो करना ही पड़ेगा।आज हम इसी पुरुषार्थ को करने से डरते जा रहे हैं।अपने मन के परिणामो अर्थात भावों को बदलने से ही हम शुद्धता और सात्विकता को ग्रहण कर सकते है।मुनिराज भी प्रत्येक क्षण अपने मन को नियंत्रित करने का पुरुषार्थ करते है जिससे वे अपनी साधना को उच्च स्तर तक ले जाने में सफल होते हैं।
खण्डवा में चातुर्मास के निमित्त विराजमान दिगम्बर जैन संत उपाध्याय विश्रुतसागर जी ने प्रवचनमाला में यह बात कही।उन्होंने कहा कि आज हम अपने देव ,शास्त्र और गुरुओं की चर्या और शिक्षा पर भी शंका करने लगे हैं जबकि सम्यग्दर्शन की पहली पायदान ही निःशंकित अंग है।बिना किसी शंका के जिनवाणी और गुरुओं की चर्या पर श्रद्धान बनाये रखना सम्यग्दर्शन की प्राप्ति में अति महत्वपूर्ण है।इसके लिये सम्यक रूप से पुरुषार्थ करना भी आवश्यक है।कार्य की सफलता और लाभ प्राप्ति में पुरुषार्थ के साथ ही पुण्य का उदय भी कारक होता है।देखने मे आता है कि पाप कार्य करने वाले व्यक्ति के पास धन लक्ष्मी आदि अकूत संपदा होती है वही दूसरी तरफ एक गहन धार्मिक,स्वाध्यायी,सरल,सरस् व्यक्ति अभावों में जी रहा है।इसमें दोनों व्यक्तियों का पुण्य और पाप सबसे बड़ा कारण है। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया की खंडवा नगर का सौभाग्य है कि इस वर्ष वर्षा काल चातुर्मास के लिए के लिए विश्रुत सागर एवं निवेद सागर जी महाराज का मंगल आगमन खंडवा में हो चुका है प्रतिदिन मुनि संघ के प्रवचन सर्राफा जैन धर्मशाला में चल रहे हैं। बुधवार को मुनी संध ने बजरंग चौक स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर में पहुंचकर मंडल विधान की पूजा के साथ ही भगवान नेमिनाथ के मोक्ष कल्याणक दिवस पर उपस्थित होकर शांति धारा एवं निर्वाण कांड का वाचन किया।
मुनि सेवा समिति के अध्यक्ष विजय सेठी ने बताया कि 4 जुलाई शुक्रवार को गणाचार्य विरागसागर जी का प्रथम समाधि दिवस पूज्य उपाध्याय विश्रुतसागर जी के सानिध्य में भक्ति भावपूर्वक मनाया जावेगा।
प्रातः 7:00 बजे जिनेन्द्र अभिषेक,7:30 बजे विरागसागर जी की पूजन एवम आचार्य छत्तीसी विधान होगा। प्रातः 9 बजे से मुनि श्री के प्रवचन एवम 10 बजे आहारचर्या होगी।शाम को 7 बजे आरती होगी।जैन धर्मशाला सराफा में आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न मंडलो, ग्रुपों द्वारा अर्घ्य समर्पित किये जायेंगे। मुनि सेवा समिति के प्रचार मंत्री सुनील जैन प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि मुनिसंघ की आहारचर्या का अवसर वन्दना अविनाश जैन एवम विजया बाई पहाड़िया परिवार को मिला।निशा पंचोलिया,प्रीति मनीष जैन रेनॉल्ड,सरिता दीपांशु जैन,रेखा महेश जैन,देवांशी जैन,अपूर्व बैनाड़ा, चिराग पाटनी, रैनी लुहाड़िया ने आहारचर्या में सहयोगी बनकर पुण्यार्जन किया।कार्यक्रम में अविनाश जैन, कांतिलाल जैन,महेश जैन,डॉ पंकज जैन,अजय जैन टिंगू, प्रेमचंद सुनील जैन, जवाहरलाल जैन,संतोष बॉस, अशोक पाटनी ,सुषमा प्रमोद जैन,सपना लुहाड़िया,सुभद्रा जैन आदि समाजजन उपस्थित थे।

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